दोस्तों , आज एक नया ब्लॉग शुरू कर रहा हूँ। सच कहूँ तो पिछले काफी दिनों से मैं सोच रहा था - सैंकड़ो बार मैं नेट पर बैठा , MS Word में कई लेख लिखे ताकि शुरू में अपने ब्लॉग पर डाल सकूँ। लेकिन हर बार मैं पीछे हटता रहा।
जब भी कुछ लिखता था तो तीन बातें ध्यान में आती थीं-
१. क्या मेरे द्वारा लिखे गए शब्द किसी के लिए कुछ सकारात्मक योगदान कर सकेंगे?
२. क्या मैंने जो लिखा है वो पूरी तरह सही है?
३. इंटरनेट की दुनिया में सैंकड़ो हजारों लोग तो ऐसा कुछ पहले ही कर चुके हैं, फिर दोहराने से क्या फायदा?
सवाल नंबर एक और दो तो मैं हल कर लेता था पर सवाल नंबर तीन मुझे उलझा देता था। और नतीजा- आज का काम कल पर टाल दिया जाता था। और यकीन मानिये दोस्तों, मुझे कई महीने लग गए ये समझने में कि सवाल नंबर तीन पूरी तरह निरर्थक था। उसकी कोई अहमियत ही नहीं थी। मैं जान गया कि अगर ऐसे सवालों को महत्व दिया तो दुनिया में कोई भी व्यक्ति , किसी भी तरह की शुरुआत ही नहीं कर पायेगा।
तो अंततः मैंने फैसला कर ही लिया है की मुझे एक ब्लॉग बनाना है। इससे मेरी लेखन शैली कुछ सुधरेगी, और मेरी भावनाओ को अभिव्यक्त होने का एक जरिया मिल जायेगा।
आज शाम को यानि 17 अक्टूबर २०१५ की शाम को , ये बात निश्चय कर ली है कि एक ब्लॉग बनाना है- अभी और बस अभी।
कबीरदास जी का एक दोहा है-
कल करे सो आज कर , आज करे सो अब
पल में परलय होएगी , बहुरि करेगा कब।
तो चलो दोस्तों, मेरा ब्लॉग भी बन जायेगा अब.
लेकिन मित्रों , पहली बार कोई काम करना आसान भी नहीं होता - खासकर मुझ जैसे लोगों के लिए जो संकोच करतें हैं। मेरे दिमाग में कुछ सवाल गूंजने लगे हैं और मैं उनके जवाब भी मन ही मन दे रहा हूँ। आइये , आपको भी इन सवालों और जवाबों से परिचित करवाता हूँ -
१. सवाल - ब्लॉग का नाम क्या रखेगा भाई? नाम बड़ा धांसू और शानदार होना चाहिए वरना लोग आकर्षित नहीं होंगे हाँ।
जवाब - भाइयों , नाम तो महीनों पहले सोच लिया था - इस ब्लॉग का नाम bodhisattva रखूँगा। इसके पीछे एक कहानी है जो बाद में बताऊंगा। पता नहीं , यह नाम आकर्षक है या नहीं , लेकिन सच कहूँ तो नाम मुझे पसंद है. वैसे भी नाम के चक्कर में काफी वक़्त जाया हुआ है। यही नाम रखता हूँ, आगे बाद में देखा जायेगा।
२. सवाल - ब्लॉग तो बना लोगे , पर लिखोगे किस विषय पर?
जवाब - दोस्तों, पहले मैं सोचता था की अपने ब्लॉग पर लेख लिखूंगा - राजनीती पर , विज्ञानं पर , खेलों पर , सिनेमा पर etc etc. पर अब यह बात खोपड़ी में आ रही है कि मुझे कुछ अलग करना चाहिए , जो लोगों को भी दिलचस्प लगे और उसके माध्यम से मैं भी अपनी बात कह सकूँ। सोचता हूँ कि कहानियों की एक सीरीज अथवा श्रृंखला शुरू करूँ जिसमे हमारे आस पास की घटनाएँ शामिल हों। मैं भी अपनी बातें कहता चलूंगा - इन कहानियों के पात्रों के माध्यम से. और लोगों का भी स्वागत रहेगा इस ब्लॉग पर ताकि वो भी अपनी कुछ सुना सकें। एक बात तो आज ही तय कर लेता हूँ - इस ब्लॉग में वही कहानियां आएँगी , वही शब्द, वही लेख लिखे जाएंगे जो हमें कोई सकारात्मक सन्देश दे सकें।
३. सवाल - ब्लॉग पर अपना परिचय क्या लिखोगे भले मानुष ? परिचय बड़ा जानदार और प्रभावशाली होना चाहिए तभी लोग तेरे विचार पढ़ेंगे।
जवाब - दोस्तों, अपने बारे में मेरा एक ही परिचय है - मैं एक आम आदमी हूँ जिसमे कुछ भी खास नहीं है. करोड़ों की भीड़ में एक मैं भी हूं। गालियां,प्यार हसीं मजाक , सांत्वना , प्रशंसा आदि सामान्य चीज़ों के अलावा और कुछ मगज़ में नहीं आता जिसे विशेष कहा जा सके।
अब सवाल और नहीं। अपने दिमाग को मैं चुप कराता हूँ - बस चुप हो जा अब - ब्लॉग शुरू हो जाने दे - दस पांच रचनाएँ उसपर डल जाने दे। उसके बाद जो चाहे बोलना -मैं सुन लूंगा। चलिए , अपने आप से बातें करने में ही काफी लिख चुका हूँ। इसे ही पहली पोस्ट के रूप में प्रकाशित कर रहा हूँ।
लेकिन एक बात जरूर कहूँगा - धन्यवाद , अपने हर पाठक को जो इस ब्लॉग को पढ़ रहे हैं।। आखिर आपने अपना समय दिया है।
चलो , ब्लॉग शुरू हो गया है। पहली पोस्ट भी प्रकाशित हो गयी है. अब सोचूंगा कि अगली कड़ी के रूप में कौन सी कहानी लिखी जाए जो मुझे भी कुछ कहने का मौका दे और मेरे पाठकों को भी एक सकारात्मक सन्देश देती हो.
एक चाइनीज़ कहावत से अंत करता हूँ -
" हजारों मील लम्बी यात्रा का आरम्भ पहले कदम से ही होता है "
धन्यवाद।
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