Bhay ka samna
दोस्तों ,कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं ,जिनके स्मरण मात्र से ही हमारे अंदर शक्ति का संचार होता है। स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व ऐसा ही है।
आज उनके जीवन से सम्बंधित एक कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ।
एक बार की बात है। स्वामी विवेकानंद कहीं जा रहे थे। तभी बंदरों ने उनका पीछा शुरू कर दिया। स्वामीजी भागने लगे। बंदर और तेजी से पीछे दौड़े। स्वामीजी पकड़ में अाने ही वाले थे। तभी एक आवाज़ गूंजी -ठहर जाओ। बंदरों का सामना करो। उनको डाँटो और वह भाग जायेंगे। स्वामी ने ऐसा ही किया। वह रुक गए। बंदरों की तरफ मुँह करके खड़े हो गए। ज्यों ही उन्होंने भृकुटि टेढ़ी की ,बंदर भाग निकले।
विवेकानंद ने आगे चलकर बहुत बार इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने हमें बताया कि जबतक हम किसी भय से भागते हैं, वह कई गुना विकराल रूप धरकर हमारा पीछा करता है। हमें डराता है। जैसे ही हम उसका सामना करने का साहस दिखाते हैं, उसकी शक्ति घटने लगती है। और हमें आगे जाने का मार्ग मिल जाता है।
दोस्तों , ये घटना तो छोटी सी है। लेकिन जीवन का एक बड़ा सबक सिखाती है वो ये कि समस्या से भागने का मतलब दरअसल उसे बढ़ावा देना है। जैसे ही हम उसका सामना करते हैं , हमारे अंदर उसे परास्त करने का साहस भी आ जाता है।
स्वामी विवेकानंद ने अबतक लाखो -करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी है। आगे जाकर इस ब्लॉग पर भी उनके और प्रसंग और विचार आएंगे।
आज एक छोटी पोस्ट लिखी है क्योंकि एक बड़ी रचना को अगली पोस्ट में डालना चाहता हूँ। अगले दो तीन दिन में आ जाएगी।
धन्यवाद।

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